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सुनिए साहिल की आवाज़ में

कई बार ऐसा होता है कि आप का प्यार आप के बेहद करीब होता है, पर आप की सोच उसे आपसे दूर कर देती है. यह केवल आपके अहसास का खेल होता है .कवि एक ऐसे ही हालत से गुजर कर निकला है…….

उन पलों को याद करता हूँ
कभी
तो
खुद को भूल जाता हूँ .

जैसे कुछ और था पहले
और कुछ अलग हूँ अभी.
जो बुरा था,
जो बेमतलब था,
खो चूका हूँ जैसे
और,
पा गया हूँ वह,
वह सब,
जो जरूरी है , शायद,
वह जो किसी किसी को मिलता है,
और वह जो
हर कोई पाना चाहता है
ऐसे या वैसे.
पहले
कुछ दूर कहीं,
शायद शुन्य में,
कहीं ताकता था.
कुछ था
ऐसा,
और पता नहीं क्यों था
कि
मैं
खुद से दूर था.
कुछ खोजता था.
हाँ शायद
खोजता ही था.
पर पता नहीं क्या,
और पता नहीं क्यों खोजता था.

हाँ,
ये पता है
कि
अब नहीं खोजता.
अब वह शून्य नहीं है
इसकी वजह तुम हो.
तुम्हारे वजूद ने
सब,
हाँ सब कुछ ,
बदल दिया है.
तुम पहले भी थी
पर टुकड़े टुकड़े हो के,
कइयों की जिंदगी का भाग थी.
उन कईयों कि
जो मुझ से अलग थे
और
जिनसे मैं अलग था.
पर अब!
तुम सिमट गयी हो अब!
तुम्हारे वजूद से
वो कई भाग
सिमट गए हैं.
जुड़ गए हैं
और
बन गए हैं मेरा
हाँ सिर्फ मेरा!

पर क्या
वो तुम हो,
जो बदल गयी हो
या ,
मेरा अहसास है
जो बदला है?
मैं दूर जाता रहा
तुम से
और अपने आप से.
पर एक अहसास
मुझे वापस ले आया,
जहाँ तुम थी.
मैं हार गया,
टूट गयी,
वो,
जो मेरी जिद थी.
खुद को
मैंने
कई बार
तुमसे दूर
था ले जाना चाहा
पर
हमेशा यही पाया
कि
मैं वहीं हूँ
वहीँ जहाँ
मेरे अहसास ने
तुम्हे
अकेला छोड़ के जाने कि
कोशिश की थी.

सुनिए साहिल की आवाज़ में

प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ प्यार भरे पल बिताने को आतुर है, पर प्रेमिका की हया उसे मधुर अहसास पाने नहीं दे रही है. ऐसे में प्रेमी अपने मन की भावनाओं को कुछ इस तरह से व्यक्त करता है …

खुली हुई लटें तेरी ,

उँगलियों पे लपेटे अपनी

मैं कहता रहूँ कुछ , और

तू सुनती ही रहे .

मैं जज्बात बयां कर दूँ

अल्फाजों में,

तू उनकी ताबीर

ख्यालों में बुनती ही रहे .

मेरे जज्बात का झोंका

तेरी आंखों को भीगा जाए

और तू कहे की पड़ा है तिनका .

ला तेरी आँख का तिनका, इसे मैं दूर कर दूँ  

आ तुझे प्यार मैं जी भर के करूँ,  आ तेरी  माँग में सिंदूर भर दूँ.

 

ये कैसी तड़प है ,

कि बुझती ही नहीं है

ये कैसा सफ़र है ,

कि मंजिल ही नहीं है

चाहतों के भँवर में,

खा रहे हैं चक्कर

बस लहर-लहर है,

साहिल ही नहीं है .

तुझे बाहों मैं छुपा के,

तेरी धड़कन को सुनूं तो,

तू हट जाए लजा के .

ला तेरी हया का आइना, इसे मैं चूर कर दूँ

आ तुझे प्यार मैं जी भर के करूँ,  आ तेरी माँग में सिंदूर भर दूँ.

 

सुनिए साहिल की आवाज़ में

काफी अरसा बीत गया है लेकिन प्रेमी अपने प्रिय के दूर जाने के बाद भी उसको भुला नहीं पाया है . वो अपने प्रेमी को याद करता है और खुद को एक सुखी धरती से सामान बताता है जो बदल का इंतज़ार सदियों से कर रहा है …. 


कितने प्यार के सावन बीते

कितनी जगह फुहार पड़ी

पर मेरे दिल का सुखा कोना

कतरे कतरे को तरसा है

सदियों बाद ये तुम आए हो

तो प्यार घडी भर को बरसा है

मैं प्यासी सुखी धरती हूँ

तुम मेरे बदल काले हो

तुम आ जाओ , आ जाओ ना, कह दो तुम आने वाले हो

 

जितना तन्हा मैं लगता था

उससे ज्यादा मैं तन्हा था

अब तन्हा रहता हुईं लेकिन

दिल का साथ नहीं तन्हा है

रात भले तन्हा हो मेरी

पर जज्बात नहीं तन्हा है

मेरी आखों का सूनापन आज नहीं है वो तन्हा है

मेरे बोलो की खामिशी आज नहीं है वो तन्हा है

तन्हा हर वो शय है जिसने पहले मुझको तन्हा किया था

वो तन्हाई जो पहले थी आज नहीं हैं वो तन्हा है

मुझसे आज सुबह ने पुछा तुम इतने बदले से क्यूँ हो ?

मैं बोला देखा था सपना की तुम फिर आने वाले हो

तुम आ जाओ , आ जाओ ना, कह दो तुम आने वाले हो

मैं प्यासी सुखी धरती हूँ

तुम मेरे बदल काले हो

तुम आ जाओ , आ जाओ ना, कह दो तुम आने वाले हो

सुनिए साहिल की आवाज़ में

प्रेमी रोने का महत्व जान तो गया पर अकेले रो लेना उसे गवांरा नहीं. दुनिया के सामने रोना भी उसके अहम को स्वीकार नहीं .अकेलेपन और उदासी मे प्रेमी अपने प्रिय को करता है – उस प्रिय को जो उसकी जिंदगी से दूर जा चुका है .प्रेमी अपने प्रेमी के लौटने की आशाएँ रखता है ताकि वो अपने पुराने प्यार को फिर पा सके और अपने प्रेमी के स्नेह को महसूस कर सके. प्रेमी एक बार अपनी प्रेयसी की गोद मे सर रख कर रोना चाहता है ,अपने गम भूलना चाहता है, सुकून पाना चाहता है. वो एक ऐसा रुदन चाहता है जो उसकी प्रयसी के दिल मे पुराना प्रेम जगा दे , और वो भी उसके दुःख और रुदन को देख कर रो दे. यही रुदन उस प्रेमी की तड़प है. ये कविता इसी तड़पते प्रेमी के नाम है …

 

एक रुदन ऐसा की बह जाए सारे,

वो आँसू , जमा है जो लेकर ,

दर्द को मेरी पलकों के भीतर

खुशियों के लिए खाली कर दें किनारे

ये हो भी जाए , मगर तू प्यार से तो मिल

एक रुदन को तड़पता है दिल…

 

एक रुदन ऐसा , न अवरोध हो

जहाँ सर हो मेरा , तेरी गोद हो

आसुओं की बहती एक कतार हो

जो बाहों में थामे वो तेरा प्यार हो

की प्यार मिले, दुलार मिले, सुकून हो हासिल

एक रुदन को तड़पता है दिल…

 

एक रुदन ऐसा कि छा जाए खामोशी

रगों में बहता प्यार , ले फिर अंगडाई

बिखरी हुई यादें फिर दे दिखाई

मेरी धडकनों कि आवाज दे तुझे ऐसी मदहोशी

प्यार का खिचाव हो, रो तू भी दे कातिल

एक रुदन को तड़पता है दिल…

सुनिए साहिल की आवाज़ में

कुछ परिस्थितियाँ इन्सान को बहुत कमजोर बना देती हैं. कई लोग तो ना केवल भीतर से कमजोर हो जाते हैं, अपितु उनका बाहरी स्वरूप भी उनकी कमज़ोरी को दिखाने लगता है. पर कई लोग ऐसे होते हैं जो कमजोर तो हो जाते हैं पर उनका अहम इस तथ्य को मान नहीं पाते. वो हर वक़्त गुमसूम तथा उदास रहते हैं पर कभी रो नहीं पाते , शायद इसलिए की उनकी नज़रो मैं रोना उनकी कमज़ोरी का प्रेतीक है. इस कविता का कवि इन्ही   लोगो मैं से एक है. वो एक ऐसे ही कठिन वक़्त मैं अपने गुम सूम और उदास व्यक्तित्व का उपहास करता हुआ कहता है – ” तेरी दुनिया उजड़ गई है और तेरा दिल टूट चुका है. तू रोना चाहता है पर बाकी दुनिया खुश नज़र आ रही है और तेरे दुख से अनजान नज़र आ रही है इसलिए तू शर्मा रहा है. अरे नादान ! ये दुनिया वाले तो पत्थर है . ये उस चाँद की तरह तेरे दुख से अंजान हैं , अंधे हैं . पर तू तो अपना दुख को समझता है. रो ले ! ये अंधे तेरी मदद नहीं कर पाएँगे .

 

है दिल तेरा टूटा

पर आँसू  ना बहाता

तू चुप ही रहता

क्यूकी चाँद है मुस्कुराता

अरे दुख अपना दीवारों से चीख चीख बोलो

है चंदा तो अँधा, पर तुम तो रोलो

 

कोशिश बहुत की

पर मंज़िल ना पाई

इज़्ज़त भी खोई

ठोकर भी खाई

अरे चेहरा अपना आसुओं  से धोलो

है चंदा तो अँधा, पर तुम तो  रोलो

सुने साहिल की आवाज़ में

 

प्रेम को अपनी मंजिल तक ले जाने के लिए और अपने प्रेमी को सदा के लिए पाने के लिए केवल प्रेम करना और निभाते जाना ही काफी नहीं है. प्रेम का सपना जितना सुहाना होता है, उतना ही नाजुक भी होता है , और उसको पूरा करने की चाहत करने वालो को सदा आशा जनक विचारो के साथ जीना जरुरी होता है. इस कविता में, प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को अपने प्यार को पाने के लिए आस रखने की प्रेरणा दी है. प्रेमी कहता है की अगर प्रेमिका चाहती है की वो एक दुसरे को सदा के लिए पायें , तो उसको अपने प्यार के मिलन की आस की ज्योति सदा अपने दिल में जलाये रखनी चाहिए. प्रेमी कह रहा है……

 

 

 

है किनारों के बीच दूरी, धारा जो बह रही है


पर धारा  जो रुक गयी तो किनारे भी तो नहीं हैं

 

भले हम-तुम रहे किनारे, मिलने की आस मारे

 

पर साथ साथ बढ़ पायें , जीवन-सुहाने पथ पर

 

तुम प्यार से भरी इक धार तो बहा लो

 

अपना मुझे बना लो…

 

 

 

जब दुविधा मे पड़े दुनियाक्या हो क्या नहीं हो,

 

निर्णय उसपे डालती है. सिक्का उछालती है

 

एक सिक्का मिला मुझे भी, जब दुविधा ने मुझको घेरा

 

एक और उसके तुम हो, एक और है अँधेरा

 

तकदीर तुम ही हो मेरी, ये सिक्का तुम ही उछालो

 

अपना मुझे बना लो…

 

 

अपनी कल्पना मे जो देखता, है शिल्पी वही बनाता

 

लक्ष्य ध्यान में धर ही धनुर्धर निशाना लगता

 

तुमको भी वोही करना, हम में दुरी रहेगी वर्ना

 

गर चाहती हो मिलन हो, तो मेरे-तुम्हारे मिलन की

 

अपने ह्रदय नयन  पर , एक तस्वीर तो सजा लो

 

अपना मुझे बना लो…

 

इस कविता का शायद एक मतलब ये भी हो सकता है …. प्रेमी को प्रेमिका छोड़ के जा चुकी है. प्रेमी अकेला है और प्रेमिका के दूर जानने के कारणों को सोच रहा है . प्रेमी के दिल में कई अहसास उमड़ आये हैं. प्रेमी अपने प्रेयसी का प्यार पुनः पाने के लिए लालायित है . वो अपने प्रिय से उम्मीद करता है की भले ही वे दोनों अलग रहें, पर उनके बीच प्रेम का रिश्ता हमेशा बना रहें .प्रेमी के लिए वो रिश्ता जीवन का पर्याय है. वो उस रिश्ते को , उस प्रेम के बंधन को उस धरा की तरह मानता है जो किनारों के अस्तित्व का कारण होती है. प्रेमी का मन्ना है की दुविधा की परिस्तिथि में उसके पास दो ही विकल्प हैं – एक तो यह की वो अपने प्रिय के साथ जीवन बिताये , अथवा, दूसरा यह की, उसका प्रिय उससे हमेशा के लिए किनारा कर ले और प्रेमी अँधेरे में डूब जाए. प्रेमी का अपने प्रेम के प्रति इतना समर्पण भावः है की, वो इस महत्वपूर्ण निर्णय को भी अपनी प्रेयसी पर छोड़ देता है. प्रेमी का दिल एक और सम्भावना के बारे में सोचता है. शायद , प्रेमिका भी प्रेमी को अपना जीवन समझती है . पर शायद , प्रेमिका ने भविष्य की अनिश्चित संभावनों और प्रतिकूल परिस्तिथियों के समक्ष विवश हो कर प्रेमी के जीवन से किनारा कर लिया हो. ऐसे स्थिति में प्रेमी आशा करता है की प्रेमिका अपने दिल में एक लक्ष्य बिठा ले और वो लक्ष्य उन्दोनो के मिलन ओर जीवन भर साथ जीने का हो. कवी के विचारों में केवल तभी सभी प्रकार की कठिनाइयों को भेद कर उनका मिलन संभव है …

 

घनी रात है , अँधेरा जवां है…

सन्नाटे मैं लिपटा मेरा जहाँ है ..

चाँदनी अगर मिल भी जाए तो क्या है?

इन आखों मैं तो तेरा चेहरा बसा है..

चाँद सुन्दर है तो क्या है ? दिल  ने तो तुमको चाहा है..

 

दिल के अरमानो की तरह, इस कविता को भी अधूरा छोड़ रखा है…..शायद बाकी फिर कभी