मेरी बहती आँखों के सपने सारे ठहरे हैं … मैं उजली रातों में शायद जग भी जाता , क्या होता मैं तन के दागों को शायद धक भी जाता , क्या होता क्या होता ,जब मेरी रातों पर यादों के पहरे हैं क्या होता, जब मन के दाग ही इतने गहरे हैं मेरी बहती [...]
Archive for मार्च, 2011
मेरी बहती आँखों के सपने सारे ठहरे हैं …
Posted in अवर्गीकृत on मार्च 14, 2011 | Leave a Comment »
… ओस की बूँद न बन जाना
Posted in अवर्गीकृत on मार्च 13, 2011 | Leave a Comment »
प्रेमी अपनी प्रेमिका से कहना चाहता है कि उसके जीवन में खुशियाँ लाने के बाद कहीं वो उसे छोड़ कर चली न जाये ……….. तुम आए जीवन में मेरे, उस पल जब थे घने अंधेरे तुमने मेरा साथ दिया तो , मैंने देखे नए सवेरे मेरी पलकों को अपना कर अपने सपने मुझे दिखा [...]
तुम आ जाओ
Posted in अवर्गीकृत on मार्च 10, 2011 | Leave a Comment »
काफी अरसा बीत गया है लेकिन प्रेमी अपने प्रिय के दूर जाने के बाद भी उसको भुला नहीं पाया है . वो अपने प्रेमी को याद करता है और खुद को एक सुखी धरती से सामान बताता है जो बदल का इंतज़ार सदियों से कर रहा है …. कितने प्यार के सावन बीते कितनी [...]
तुम गुस्सा छिपा के देखो, मैं प्यार छुपाऊँगा !
Posted in अवर्गीकृत on मार्च 9, 2011 | Leave a Comment »
दो प्रेमी बड़े प्यार से एक दुसरे के साथ उपवन में दुनिया से छुप कर बैठे हैं . प्रेमिका प्यार करना चाहती है , लेकिन प्रेमी किसी बात पर चिड जाता है. प्रेमिका खूब प्रयास करती है कि उसके प्रेमी का मूड ठीक हो जाए , पर प्रेमी अड़ा रहता है. काफी देर बीतने पर प्रेमिका नाराज हो जाती [...]
वो जाती है तो जाए ,मुझे ना बताये
Posted in अवर्गीकृत on मार्च 9, 2011 | Leave a Comment »
प्रेमिका कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जा रही है ! प्रेमी को ये बात चुभ रही है I वो प्रेमिका को प्यार से इस कविता में ताने मार रहा है वो जाती है तो जाए ,मुझे ना बताये जो उसके महकते बदन से , आती है खुशबू , जैसी आऐ चमन [...]
ये तुम कैसे बदल गए !
Posted in अवर्गीकृत on मार्च 9, 2011 | Leave a Comment »
प्रेमी के बहुत वर्षों तक असीम प्यार करने वाली प्रेमिका अचानक प्रेमी को छोड़ कर जाने को तेयार है. प्रेमी लिखता है … ये तुम कैसे बदल गए ! मुझसे करते थे , प्रेम अपार जीवन से ज्यादा मुझे चाहने वाले तुम अब, मुझमे दूढ़ते हो विकार मैं जिनकी हुआ करता [...]
ना बँधे जो हम तुम बंधन में , तो प्रेम की डोरी कसना ना
Posted in अवर्गीकृत on मार्च 8, 2011 | Leave a Comment »
ना बँधे जो हम तुम बंधन में , तो प्रेम की डोरी कसना ना शायद वो घड़ी भी आएगी, जो मुझे रुला कर जाएगी ना बोल सको तो ना कहना ,विरोध ना करना चुप ही रहना तुम हँसी हँसी हो जाना दूर , कह देना कि हो मजबूर मैं हँसी हँसी कर [...]