ना बँधे जो हम तुम बंधन में , तो प्रेम की डोरी कसना ना
शायद वो घड़ी भी आएगी, जो मुझे रुला कर जाएगी
ना बोल सको तो ना कहना ,विरोध ना करना चुप ही रहना
तुम हँसी हँसी हो जाना दूर , कह देना कि हो मजबूर
मैं हँसी हँसी कर दूंगा विदा, हर साँस हर धड़कन तुझ पे फ़िदा ,
मेरे प्यार की गहराई में उतरो , दीवाना कह कर हँसना ना
ना बँधे जो हम तुम बंधन में , तो प्रेम की डोरी कसना ना
तुमसे सपने सजे हैं मेरे, तुम से मैंने संसार सजाया
बाँहों का मुझको देना प्यार, आँचल की तुम देना छाया
मेरे आँगन की तुम ज्योति , खुशियों की माला के मोती
पर पुरवाई के चलने पर, सागर में भाटा चढने पर
किसी और के आँगन में जलना, किसी और की माला में पलना
तुम जाना , लाख ख़ुशी से जाना ! पर दूर अभी से बसना ना
ना बँधे जो हम तुम बंधन में , तो प्रेम की डोरी कसना ना