प्रेमिका कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जा रही है ! प्रेमी को ये बात चुभ रही है I वो प्रेमिका को प्यार से इस कविता में ताने मार रहा है
वो जाती है तो जाए ,मुझे ना बताये
जो उसके महकते बदन से ,
आती है खुशबू , जैसी आऐ चमन से
मैं फूलों से खेलूँगा , वो न तरस खाए
वो जाती है तो जाए ,मुझे ना बताये .
जो कहती थी मुझसे , शर्मा के , रुक रुक के -
तुम मेरी गली आना , देखूँगी चुप चुप के
अब उस राह ना गुजरूँगा , वो ख़ुशी से जाए
वो जाती है तो जाए ,मुझे ना बताये .
जो हाथ को जकड के , वो कहती थी हमसे
एक पल न रह सकूंगी , बिना आपने सनम के !
वो दूसरा सनम है , हम दिल को ये समझायें
वो जाती है तो जाए ,मुझे ना बताये