काफी अरसा बीत गया है लेकिन प्रेमी अपने प्रिय के दूर जाने के बाद भी उसको भुला नहीं पाया है . वो अपने प्रेमी को याद करता है और खुद को एक सुखी धरती से सामान बताता है जो बदल का इंतज़ार सदियों से कर रहा है ….
कितने प्यार के सावन बीते
कितनी जगह फुहार पड़ी
पर मेरे दिल का सुखा कोना
कतरे कतरे को तरसा है
सदियों बाद ये तुम आए हो
तो प्यार घडी भर को बरसा है
मैं प्यासी सुखी धरती हूँ
तुम मेरे बदल काले हो
तुम आ जाओ , आ जाओ ना, कह दो तुम आने वाले हो
जितना तन्हा मैं लगता था
उससे ज्यादा मैं तन्हा था
अब तन्हा रहता हुईं लेकिन
दिल का साथ नहीं तन्हा है
रात भले तन्हा हो मेरी
पर जज्बात नहीं तन्हा है
मेरी आखों का सूनापन आज नहीं है वो तन्हा है
मेरे बोलो की खामिशी आज नहीं है वो तन्हा है
तन्हा हर वो शय है जिसने पहले मुझको तन्हा किया था
वो तन्हाई जो पहले थी आज नहीं हैं वो तन्हा है
मुझसे आज सुबह ने पुछा तुम इतने बदले से क्यूँ हो ?
मैं बोला देखा था सपना की तुम फिर आने वाले हो
तुम आ जाओ , आ जाओ ना, कह दो तुम आने वाले हो
मैं प्यासी सुखी धरती हूँ
तुम मेरे बदल काले हो
तुम आ जाओ , आ जाओ ना, कह दो तुम आने वाले हो